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सभ्यता का क्रूर काल है जहां ना किसी के जीने से किसी को कोई मतलब है ना मरने से ! - मंजुल भारद्धाज

ईमानदार छवि के साथ राजनैतिक परिपक्वता, समझ होना ज़रूरी है आंदोलन के मक़सद को हासिल करने के लिए! वरना सत्ता उसे अपना मोहरा बना लेती है! - मंजुल भारद्वाज

अध्यात्म ईश्वर को नहीं स्वयं को पाने की स्थिति है। यह स्थिति तब प्राप्त होती है जब आप धर्म,कर्मकांड और ईश्वर से मुक्ति पाते हो ! - मंजुल भारद्वाज !

जेन जी का प्रतिरोध उत्सव अपना लक्ष्य हासिल करे तभी लोकतंत्र बचेगा ! - मंजुल भारद्वाज

गुणगान करने और गुणों को धारण करने में अंतर है। समाज गुणगान ज़्यादा करता है और गुणों को धारण कम ! जिस घड़ी समाज गुणों को धारण ज़्यादा करेगा उस दिन व्यवस्था न्याय संगत बनेगी ! - मंजुल भारद्वाज

फ़ासीवाद का पैरोकार कलाकार नहीं हो सकता ! - मंजुल भारद्वाज