- Get link
- X
- Other Apps
Posts
- Get link
- X
- Other Apps
What is revolution in art? Revolution in art is not bloodshed to overthrow the governments or empires. Revolution in art is to awaken the human beings. An awaken state of people is essential to safe guard humanity! – Manjul Bhardwaj #Art #Revolution #ManjulBhardwaj
What is revolution in art? Revolution in art is not bloodshed to overthrow the governments or empires. Revolution in art is to awaken the human beings. An awaken state of people is essential to safe guard humanity! – Manjul Bhardwaj #Art #Revolution #ManjulBhardwaj
- Get link
- X
- Other Apps
THEATRE IS NOT ONLY A MIRROR OF SOCIETY BUT A PATH TO ENLIGHTEN THE CONSCIOUSNESS OF SOCIETY TO BE BETTER & HUMANE! - MANJUL BHARDWAJ
THEATRE IS NOT ONLY A MIRROR OF SOCIETY BUT A PATH TO ENLIGHTEN THE CONSCIOUSNESS OF SOCIETY TO BE BETTER & HUMANE! - MANJUL BHARDWAJ
- Get link
- X
- Other Apps
- Get link
- X
- Other Apps
- Get link
- X
- Other Apps
कला वो चैतन्य है जो मनुष्य के DNA में ब्रह्मांडीय सहअस्तित्व और विविध स्वरूप के जीवन मूल्यों की नक्काशी करती है ! - मंजुल भारद्वाज
कला वो चैतन्य है जो मनुष्य के DNA में ब्रह्मांडीय सहअस्तित्व और विविध स्वरूप के जीवन मूल्यों की नक्काशी करती है ! - मंजुल भारद्वाज
- Get link
- X
- Other Apps
ज़िंदा रहने के लिए कोई कहां तक लड़े, हाकिमों ने हवा, पानी, जमीन, आसमां में जहर फैला कर आग लगा दी हैं। - मंजुल भारद्वाज
ज़िंदा रहने के लिए कोई कहां तक लड़े, हाकिमों ने हवा, पानी, जमीन, आसमां में जहर फैला कर आग लगा दी हैं। - मंजुल भारद्वाज
- Get link
- X
- Other Apps
- Get link
- X
- Other Apps
- Get link
- X
- Other Apps
“मनुष्य में आत्मबल और आत्महीनता का भाव होता है. आत्मबल से विचार उपजता है और आत्महीनता विकारों को जन्म देती हैं. सदविचार निर्माण करते हैं और विकार विध्वंस ! व्यक्ति जब आत्महीन प्रवृति से ग्रस्त हो जाए तो वो पूरे समाज को विकारों से भर देता है. विचारों के सामने जब विकार विकराल होता है तब समाज विघटित होता है और संस्कृति कलंकित !" - मंजुल भारद्वाज
“मनुष्य में आत्मबल और आत्महीनता का भाव होता है. आत्मबल से विचार उपजता है और आत्महीनता विकारों को जन्म देती हैं. सदविचार निर्माण करते हैं और विकार विध्वंस ! व्यक्ति जब आत्महीन प्रवृति से ग्रस्त हो जाए तो वो पूरे समाज को विकारों से भर देता है. विचारों के सामने जब विकार विकराल होता है तब समाज विघटित होता है और संस्कृति कलंकित !" - मंजुल भारद्वाज
- Get link
- X
- Other Apps
- Get link
- X
- Other Apps
गिरगिटों की रंगनुमाइश को मुख्यधारा कहना रंगकर्म की अल्प समझ है.रंगकर्मियों को इससे उपर उठने की ज़रूरत है.मुद्दा जन सरोकारों के जुनून और समर्पण का है! - मंजुलभारद्वाज
गिरगिटों की रंगनुमाइश को मुख्यधारा कहना रंगकर्म की अल्प समझ है.रंगकर्मियों को इससे उपर उठने की ज़रूरत है.मुद्दा जन सरोकारों के जुनून और समर्पण का है! - मंजुलभारद्वाज
- Get link
- X
- Other Apps