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ईमानदार छवि के साथ राजनैतिक परिपक्वता, समझ होना ज़रूरी है आंदोलन के मक़सद को हासिल करने के लिए! वरना सत्ता उसे अपना मोहरा बना लेती है! - मंजुल भारद्वाज

अध्यात्म ईश्वर को नहीं स्वयं को पाने की स्थिति है। यह स्थिति तब प्राप्त होती है जब आप धर्म,कर्मकांड और ईश्वर से मुक्ति पाते हो ! - मंजुल भारद्वाज !

जेन जी का प्रतिरोध उत्सव अपना लक्ष्य हासिल करे तभी लोकतंत्र बचेगा ! - मंजुल भारद्वाज

गुणगान करने और गुणों को धारण करने में अंतर है। समाज गुणगान ज़्यादा करता है और गुणों को धारण कम ! जिस घड़ी समाज गुणों को धारण ज़्यादा करेगा उस दिन व्यवस्था न्याय संगत बनेगी ! - मंजुल भारद्वाज

फ़ासीवाद का पैरोकार कलाकार नहीं हो सकता ! - मंजुल भारद्वाज

“सत्ता पोषित रंगमंच, संसाधन सम्पत्र रंगकर्म कभी सरोकारों की बात नहीं करता, वो मुख्यधारा का रंगकर्म नहीं होता .. हाँ सत्ता उसका ढिंढोरा ज़रूर पीटती है.. पर भारत में मुख्यधारा का रंगमंच, वही है जो देश के सुदूर शहरों, कस्बों और गांवों का रंगमंच है, जो संसाधन विहीनता के बावजूद अपने जुनून, उत्साह और सामाजिक-राजनीतिक दायित्वबोध से संचालित होता है।” - मंजुल भारद्वाज

आओ सद्बुद्धि, विवेक जगाएं ध्वनि और वायु प्रदूषण मुक्ति के लिए 'दीप ' जलाएं ! - मंजुल भारद्वाज

संवाद का अर्थ है सद् विवेक बुद्धि संप्रेषण! - मंजुल भारद्वाज

What is revolution in art? Revolution in art is not bloodshed to overthrow the governments or empires. Revolution in art is to awaken the human beings. An awaken state of people is essential to safe guard humanity! – Manjul Bhardwaj #Art #Revolution #ManjulBhardwaj

THEATRE IS NOT ONLY A MIRROR OF SOCIETY BUT A PATH TO ENLIGHTEN THE CONSCIOUSNESS OF SOCIETY TO BE BETTER & HUMANE! - MANJUL BHARDWAJ

देखा सुना पढ़ा लिखा समझा जिया अधूरा है खोज और सृजन बिना ! - मंजुल भारद्वाज

कहाँ कहाँ कब क्या क्या लिख गए ... अब तो रह रह कर शब्द सुना रहें हैं अपनी दास्ताँ ! - मंजुल भरद्वाज