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जीरो बजेट चुनाव करेगा देश का बचाव ! -मंजुल भारद्वाज

ये आईना अपने हिसाब से देखते हैं ... और आईना ' आईन ' दिखाये तो उसे तोड़ देते हैं ! - मंजुल भारद्वाज

विवेक की बजाय संख्यात्मक प्रभुत्व ' लोकतंत्र ' की आत्मनिहित खामी है ! - मंजुल भारद्वाज

विविधता ही कला है सार्थकता उसका सौंदर्यशास्त्र ! - मंजुल भारद्वाज

' विचार - प्रकृति ' ध्वंस के लिए भूमंडलीकरण ने ' भक्तों ' की भीड़ पैदा की है - मंजुल भारद्वाज

सिर्फ़ चुनाव ' जीतने' को ' लोकतंत्र ' समझना, लोकतंत्र की हार - मंजुल भारद्वाज

रंगकर्म : दृश्य शब्द की संजीवनी है ! -मंजुल भारद्वाज

राजनीति " तात्विक " रूप से स्थिर होते हुए भी मौसम मिजाज़ है ! राजनीति के " मौसमी " स्वभाव से डरता है " सामान्य " आदमी ! - मंजुल भारद्वाज

विलाप नहीं राजनैतिक ' कीचड़ ' को साफ़ करने के लिए ' चिंतन ' की घड़ी है - मंजुल भारद्वाज

जीवन प्रतीक्षालय नहीं, सृजनालय है - मंजुल भारद्वाज

लोकतंत्र में जनता का विकल्प नहीं होता -मंजुल भारद्वाज

हर हुक्मरान ये जान ले, इतिहास से संज्ञान ले जिसने जनता का दमन किया, जनता ने उसको दफ़न किया ! - मंजुल भारद्वाज

तानाशाही हुक्मरानों की लाख ' चोट' लोकतंत्र में जनता की ताक़त एक ' वोट' - मंजुल भारद्वाज

" कथनी और करनी ही आपको आपकी 'पहचान ' देती है " - मंजुल भारद्वाज

" कला एक निरंतर खोज है " - रंगचिंतक मंजुल भारद्वाज

जनमत, बहुमत और नीति सम्मत ये लोकतंत्र के आत्मजन्य द्वंद्व हैं - मंजुल भारद्वाज

एकाधिकारवाद 'विविधता' के लिए विध्वंसक है - मंजुल भारद्वाज

YES ! WE ARE A DROP OF AN OCEAN, LET'S MAKE IT COUNT ! - MANJUL BHARDWAJ

भूमंडलीकरण अपने 'अर्थहीन ' होने का ' दौर ' है - मंजुल भारद्वाज

कला शुद्धिकरण की शाश्वत प्रक्रिया है... - मंजुल भारद्वाज

Art is an eternal process of purification... -Manjul Bhardwaj

राजनीति से कभी दूर मत भागिए सत्ता से सचेत रहिये व्यवस्था को हर पल बदलिए ! - मंजुल भारद्वाज

मनोरोगी जब सत्ता आसीन हो जाएँ तो इसका अर्थ है साहित्य, रंगमंच, कला और संस्कृति का रसातल में चले जाना ! - मंजुल भारद्वाज

लोकतंत्र एक मजबूत 'विवेक तन्त्र' से चलता है..चुनाव हारने या जीतने से नहीं ! - मंजुल भारद्वाज

"कला वो जो ' कला ' भाव जगाये जो विचार को शुद्धिकरण के लिए उत्प्रेरित करे.. बाकी सब कला के नाम पर भोगवाद का बाजार है " - मंजुल भारद्वाज

व्यवस्था से हारी भीड़ जब गांव छोड़ शहर की ओर भागती है तब उसका लक्ष्य क्रांति नहीं सिर्फ पेट भरना होता है जिस दिन व्यवस्था से पलायन व्यवस्था निर्माण का संकल्प लेगा भारत में सिर्फ ग्राम स्वराज होगा ! - मंजुल भारद्वाज