सभ्यता का क्रूर काल है जहां ना किसी के जीने से किसी को कोई मतलब है ना मरने से ! - मंजुल भारद्धाज

 सभ्यता का क्रूर काल है 

जहां ना किसी के जीने से 

किसी को कोई मतलब है

 ना मरने से ! 

- मंजुल भारद्धाज


सभ्यता का क्रूर काल है   जहां ना किसी के जीने से   किसी को कोई मतलब है   ना मरने से !   - मंजुल भारद्धाज


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