गुणगान करने और गुणों को धारण करने में अंतर है। समाज गुणगान ज़्यादा करता है और गुणों को धारण कम ! जिस घड़ी समाज गुणों को धारण ज़्यादा करेगा उस दिन व्यवस्था न्याय संगत बनेगी ! - मंजुल भारद्वाज

 

गुणगान करने और  गुणों को धारण करने में अंतर है।  समाज गुणगान ज़्यादा करता है  और गुणों को धारण कम ! जिस घड़ी समाज गुणों को धारण  ज़्यादा करेगा उस दिन व्यवस्था  न्याय संगत बनेगी !  - मंजुल भारद्वाज



गुणगान करने और 

गुणों को धारण करने में अंतर है। 

समाज गुणगान ज़्यादा करता है 

और गुणों को धारण कम !

जिस घड़ी समाज गुणों को धारण 

ज़्यादा करेगा उस दिन व्यवस्था

 न्याय संगत बनेगी !

- मंजुल भारद्वाज

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