ज़िंदा रहने के लिए कोई कहां तक लड़े, हाकिमों ने हवा, पानी, जमीन, आसमां में जहर फैला कर आग लगा दी हैं। - मंजुल भारद्वाज

 ज़िंदा रहने के लिए 

कोई कहां तक लड़े,


हाकिमों ने 

हवा, पानी, जमीन, आसमां में 

जहर फैला कर 

आग लगा दी हैं।


- मंजुल भारद्वाज


ज़िंदा रहने के लिए  कोई कहां तक लड़े,  हाकिमों ने  हवा, पानी, जमीन, आसमां में  जहर फैला कर  आग लगा दी हैं।  - मंजुल भारद्वाज


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