“मनुष्य में आत्मबल और आत्महीनता का भाव होता है. आत्मबल से विचार उपजता है और आत्महीनता विकारों को जन्म देती हैं. सदविचार निर्माण करते हैं और विकार विध्वंस ! व्यक्ति जब आत्महीन प्रवृति से ग्रस्त हो जाए तो वो पूरे समाज को विकारों से भर देता है. विचारों के सामने जब विकार विकराल होता है तब समाज विघटित होता है और संस्कृति कलंकित !" - मंजुल भारद्वाज

 “मनुष्य में आत्मबल और आत्महीनता का भाव होता है. आत्मबल से विचार उपजता है और आत्महीनता विकारों को जन्म देती हैं. सदविचार निर्माण करते हैं और विकार विध्वंस ! व्यक्ति जब आत्महीन प्रवृति से ग्रस्त हो जाए तो वो पूरे समाज को विकारों से भर देता है. विचारों के सामने जब विकार विकराल होता है तब समाज विघटित होता है और संस्कृति कलंकित !"

- मंजुल भारद्वाज

“मनुष्य में आत्मबल और आत्महीनता का भाव होता है. आत्मबल से विचार उपजता है और आत्महीनता विकारों को जन्म देती हैं. सदविचार निर्माण करते हैं और विकार विध्वंस ! व्यक्ति जब आत्महीन प्रवृति से ग्रस्त हो जाए तो वो पूरे समाज को विकारों से भर देता है. विचारों के सामने जब विकार विकराल होता है तब समाज विघटित होता है और संस्कृति कलंकित !" - मंजुल भारद्वाज


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