कहाँ कहाँ कब क्या क्या लिख गए ... अब तो रह रह कर शब्द सुना रहें हैं अपनी दास्ताँ ! - मंजुल भरद्वाज

 कहाँ कहाँ  

कब  

क्या क्या लिख गए ... 

अब तो रह रह कर  

शब्द सुना रहें हैं  

अपनी दास्ताँ ! - मंजुल भरद्वाज


कहाँ कहाँ  कब  क्या क्या लिख गए ... अब तो रह रह कर  शब्द सुना रहें हैं  अपनी दास्ताँ ! - मंजुल भरद्वाज


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