मानवीय विष को .. विष के प्रभाव को निष्क्रिय करने की क्षमता .. केवल और केवल कला में है .. यही कला का मकसद और यही कला का साध्य है .... मंजुल भारद्वाज

 मानवीय विष को .. विष के प्रभाव को निष्क्रिय करने की क्षमता .. केवल और केवल कला में है .. यही कला का मकसद और यही कला का साध्य है ....

- मंजुल भारद्वाज


मानवीय विष को .. विष के प्रभाव को निष्क्रिय करने की क्षमता .. केवल और केवल कला में है .. यही कला का मकसद और यही कला का साध्य है .... मंजुल भारद्वाज


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