'हम समाज में थिएटर के प्रभाव का गुणगान करते हैं। लेकिन रंगकर्म (थिएटर) में हमारी प्रत्यक्ष भागीदारी नगणय है। दर्शक होने के नाते नाटक के मंचन या प्रस्तुति का हम पर गहरा असर पड़ता है। लेकिन प्रत्यक्ष रूप से नाटक (थिएटर) में भागीदारी से हमारे व्यक्तित्व, विचार और मूल्यों में परिवर्तन होता है।' - मंजुल भारद्वाज
'हम समाज में थिएटर के प्रभाव का गुणगान करते हैं। लेकिन रंगकर्म (थिएटर) में हमारी प्रत्यक्ष भागीदारी नगणय है। दर्शक होने के नाते नाटक के मंचन या प्रस्तुति का हम पर गहरा असर पड़ता है। लेकिन प्रत्यक्ष रूप से नाटक (थिएटर) में भागीदारी से हमारे व्यक्तित्व, विचार और मूल्यों में परिवर्तन होता है।'
- मंजुल भारद्वाज

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